देहरादून, 3 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
Uttarakhand Monsoon Update : धारचूला से आगे तवाघाट और मांगती जैसे बेहद संवेदनशील सीमांत इलाकों में लगातार पहाड़ दरकने और भूस्खलन के भीषण खतरे को देखते हुए प्रशासन ने आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा को अगले आदेश तक पूरी तरह रोक दिया है। देश के कोने-कोने से आ रहे श्रद्धालुओं की जान सुरक्षित रखने के लिए यह बड़ा कदम उठाया गया है। अब किसी भी यात्री को इनरलाइन परमिट जारी नहीं किया जाएगा।
इस साल 1 मई से शुरू हुई इस यात्रा ने शुरुआती दो महीनों में नया इतिहास रचा था। मई और जून के भीतर ही 52 हजार 441 श्रद्धालु आदि कैलाश के दर्शन कर चुके हैं। सीमांत सड़कों पर हालात बदतर हैं, जिसके चलते जिला प्रशासन ने बाहर से आने वाले लोगों से मौसम साफ होने तक अपनी यात्रा टालने की सीधी अपील की है।
पगनो गांव के ऊपरी हिस्से में स्थित कमेड़ा पानी की पहाड़ियों पर गुरुवार देर रात बादल फटने जैसी मूसलाधार बारिश हुई। वहां से छूटा भारी मलबा बरसाती नाले के रास्ते तबाही मचाते हुए छह किलोमीटर नीचे तक आ गया। गुलाबकोटी के बौंला में यह सारा मलबा बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर जमा हो गया। करीब 300 मीटर से ज्यादा का हाईवे देखते ही देखते गहरे दलदल और बड़े-बड़े बोल्डरों के मलबे में तब्दील हो गया।
सुबह चार बजे बंद हुआ बदरीनाथ हाईवे पूरे दिन की मशक्कत के बाद शाम साढ़े चार बजे खोला जा सका। इस दौरान हाईवे के दोनों तरफ तीन से चार किलोमीटर लंबी गाड़ियों की कतारें खड़ी रहीं, जिसमें तीर्थयात्री भूख-प्यास से तड़पते रहे। रास्ता साफ होने के बाद प्रशासन ने जोशीमठ की तरफ फंसे वाहनों को ऋषिकेश की ओर रवाना किया।
ज्योतिर्मठ के इसी पगनो गांव में तड़के एक मकान मलबे में समा गया। सतेश्वर प्रसाद के मकान की छत तोड़कर नाले का कीचड़ अंदर घुस गया। उनकी पत्नी किसी तरह जान बचाकर बाहर भागीं, लेकिन सतेश्वर मलबे के बीच ही फंस गए। ग्रामीणों ने आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें जिंदा बाहर निकाला।
यमुनोत्री धाम के पास जानकीचट्टी से भी ऐसी ही डराने वाली खबर आई। वहां नारायण पुरी गांव के निवासी संदीप सिंह के रिहायशी मकान पर अचानक एक विशालकाय बोल्डर आकर गिरा, जिससे पूरे घर को भारी नुकसान पहुंचा है।
सड़कों के बंद होने का सबसे ज्यादा असर चमोली और देहरादून जिलों में देखा जा रहा है। लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक चमोली में 23, देहरादून में 20, टिहरी में 14, पिथौरागढ़ में 9, पौड़ी और बागेश्वर में 8-8 सड़कें बंद हैं। रुद्रप्रयाग में 6, नैनीताल में 4 और अल्मोड़ा में 3 मुख्य मार्गों पर यातायात पूरी तरह ठप है।
लोनिवि के विभागाध्यक्ष राजेश शर्मा ने बताया कि विभिन्न बंद सड़कों में से 25 को देर शाम तक भारी मशीनों की मदद से चालू कर दिया गया था। गढ़वाल में मार्ग बंद होने से 10 हजार से अधिक की आबादी पूरी तरह अलग-थलग पड़ गई है। कुमाऊं के पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत में भी हजारों लोग जरूरी सामान के लिए तरस रहे हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र ने अलर्ट जारी करते हुए नैनीताल और बागेश्वर जिलों में शुक्रवार को अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी है। देहरादून, टिहरी, पौड़ी, चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के कई इलाकों में गर्जना के साथ तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है।
